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What should be applied in sugarcane crop गन्ने की पैदावार कैसे बढ़ाये

What should be applied in sugarcane crop

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गन्ने की उन्नत किस्में

Ganne ki Paidawar Kaise Badhaye भारत की महत्वपूर्ण वाणिज्यिक फसलों में से एक है। भारत वर्ष में केवल गन्ने के द्वारा ही चीनी निर्मित होती हैं। गन्ने के क्षेत्रफल में भारत का विश्व में प्रथम स्थान है, परन्तु चीनी उत्पादन में ब्राजील के बाद दूसरा स्थान है। इसके अलावा उपभोग के मामले में भी भारत दूसरे नंबर पर है। गन्ने को खाने के अलावा जूस बनाकर भी पिया जाता है

इसके जूस से गुड़, शक्कर और शराब आदि चीजों को बनाया जाता है। यह एक ऐसी फसल है, जिस पर जलवायु परिवर्तन का कोई खास असर नहीं देखने को मिलता है। जिस वजह से यह एक सुरक्षित खेती भी कहलाती है। हमारे देश में गन्ना एक नकदी फसल है जिसकी खेती प्रति वर्ष लगभग 30 लाख हेक्टेयर भू-क्षेत्र में की जाती है। आज के समय में भी किसान भाई गन्ने को परंपरागत तरीके से उगाते है

अधिक पैदावार

What should be applied in sugarcane crop किसानों को कम लागत में अधिक उपज व आमदनी के लिये उन्नतशील किस्मों एवं वैज्ञानिक तरीकों से गन्ने की खेती करना आवश्यक है। आज वर्तमान समय में बाजारो में गन्ने की कई उन्नत किस्मे देखने को मिल जाती है, जिन्हे उगाकर किसान भाई अधिक पैदावार और लाभ भी प्राप्त कर रहे है। यदि आप भी गन्ने की खेती कर अच्छी कमाई करना चाहते है, तो ट्रैक्टर जंक्शन की इस पोस्ट को अंत तक ध्यान पूर्वक पढ़े। आज हम आपको इस पोस्ट के जरिये गन्ने की खेती कैसे करे के बारे में जानकारी देने जा रहे है

गन्ने के बीजों की रोपाई (बुवाई) का तरीका

What should be applied in sugarcane cropभारत में गन्ने की बुवाई मुख्यतः समतल और नाली विधि से की जाती है समतल विधि में 90 सेमी. की दूरी पर 7 से 10 सेंमी. गहरे देशी हल से कूँड़ बनाएं और कूँड़ों में गन्ने के छोटे -छोटे टुकड़े जिनमे 2 से 3 आँखें हो की बुवाई सिरे से सिरा मिला करें। इस तरह से टुकड़ो को डालने के पश्चात् पाटा लगाकर खेत को समतल कर दिया जाता है। किसान भाई आज भी इस परम्परागत विधि द्वारा गन्ने के बीजो की रोपाई करना पसंद करते है।

Ganne ki Paidawar Kaise Badhaye नाली विधि में 90 सेमी की दूरी पर 45 सेमी चौड़ी, 15-20 सेंमी.गहरी नाली बना ली जाती है एवं नाली में बीज को सिरे से सिरा मिलाकर बुवाई की जाती है गन्ने की आंखे आजू-बाजू में हो ऐसा रखें दोनों आंखे नाली की बगल की तरफ रहनी चाहिए। नालियों की दोनों और अंत में जल को रोकने के लिए आड़ी रोपाई कर की जाती है। इस दौरान कम बारिश होने पर भी खेत में पानी की कमी नहीं होती है, और पानी ज्यादा हो जाने की स्थिति में उसे एक छोड़ से खोल दिया जाता है।  बुवाई के समय कूँड़ में पहले उर्वरक डालें उसके ऊपर गन्ने के बीज की बुवाई करें

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गन्ने के लिए उर्वकर 

What should be applied in sugarcane crop खाद एवं रसायनिक उर्वरकों का प्रयोग फसलो की सही बढ़बार, उपज और गुणवत्ता के लिये पोषक तत्वों का सही अनुपात और जरुरी मात्रा में मिट्टी परिक्षण प्रतिवेदन (रिपोर्ट) के अनुसार ही प्रयोग करें। गन्ना फसल के लिये लगभग 50 क्विंटल गोबर खाद या कम्पोस्ट खाद का उपयोग गन्ना बुवाई के समय नालियों में डालकर करना चाहिए। गन्ने में 300 कि. नत्रजन (650 किलो यूरिया), 80 किलो स्फुर, (500 कि. सुपरफास्फेट) एवं 90 किलो पोटाश (150 कि.ग्रा. म्यूरेट ऑफ पोटाश) प्रति हेक्टर देवें। जहाँ तक संभव हो सरल खाद जैसे यूरिया, सुपरफास्फेट, व म्यूरेट ऑफ पोटाश जैसे उर्वरको अनुशासित मात्रा में ही फसल को दें।

सिंचाई एवं खरपतवार नियंत्रण

गन्ने के बीजो की रोपाई नम भूमि में की जाती है। इसलिए इन्हे आरम्भ में सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है। शीतकाल में 15 दिन के अंतर एवं गर्मी में 8 से 10 दिन के अंतर पर सिंचाई करें। बुवाई के लगभग 4 माह तक खरपतवारों की रोकथाम आवश्यक होती है। इसके लिए 3 से 4 बार निंदाई करना चाहिए। रासायनिक नियंत्रण के लिए अट्राजिन 160 ग्राम प्रति एकड़ 325 लीटर पानी में घोलकर अंकुरण के पूर्व छिड़काव करें

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